BPSC 70वीं PT परीक्षा दोबारा नहीं होगी। पटना हाईकोर्ट से शुक्रवार को कैंडिडेट्स को झटका लगा है। कोर्ट ने री-एग्जाम की याचिका खारिज कर दी है। गुरु रहमान ने कहा कि ‘हमारे पास परीक्षा में धांधली के सबूत हैं। हम जल्द सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।’
कैंडिडेट्स ने कहा- ‘101 दिन से हम पटना के गर्दनीबाग में प्रदर्शन कर रहे हैं। हमने कोर्ट को सभी सबूत दे दिए थे। हम अब सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।’ हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते प्रारंभिक एग्जाम रद्द करने और दोबारा कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली थी।
हाईकोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस आशुतोष कुमार और जस्टिस पार्थ सारथी की बेंच ने 19 मार्च को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
अभ्यर्थियों ने परीक्षा में धांधली और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूरे एग्जाम को रद्द करने की मांग की थी। वहीं, राज्य सरकार और आयोग ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
क्या है पूरा मामला?
13 दिसंबर 2024 को बिहार के विभिन्न जिलों में 70वीं बीपीएससी पीटी परीक्षा का आयोजन किया गया था। एग्जाम के दौरान पटना के बापू परीक्षा केंद्र में हंगामा हुआ। कैंडिडेट्स ने पेपर देर से मिलने और लीक होने जैसे आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
परीक्षा के 3 दिन बाद, जिला प्रशासन की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए आयोग ने बापू परीक्षा केंद्र की परीक्षा रद्द कर दी। इसमें असामाजिक तत्वों द्वारा हंगामा किए जाने की बात कही गई।
एक सेंटर का एग्जाम रद्द होने के बावजूद, अभ्यर्थी पूरी परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। गर्दनीबाग में 18 दिसंबर से अभ्यर्थियों का प्रदर्शन जारी है।
पटना हाईकोर्ट में चली लंबी सुनवाई
18 मार्च को पटना हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी हुई थी। कार्यकारी चीफ जस्टिस आशुतोष कुमार और जज पार्थ सारथी की खंडपीठ ने इस पर विस्तृत सुनवाई की थी। सुबह 10:30 बजे से लेकर शाम 4:00 बजे तक लगातार सुनवाई चली। कोर्ट ने छह अलग-अलग याचिकाओं पर विचार किया और अंत में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
सरकार ने कोर्ट में रखा पक्ष
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी.के. शाही ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा, ‘परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई थी और सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया गया था। सेंटर पर जैमर लगे थे। सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। बापू सेंटर पर कुछ छात्रों ने हंगामा किया था। वहां परीक्षा बाधित हुई थी।
इस मामले में अगमकुआं थाने में 2 FIR दर्ज की गई थी। कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी। अनुशासन भंग करने के आरोप में कुछ छात्रों को तीन साल तक बीपीएससी परीक्षा देने से प्रतिबंधित कर दिया गया था।
अभ्यर्थियों की आपत्तियां और कोर्ट की टिप्पणी
अभ्यर्थियों ने परीक्षा में धांधली और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूरी परीक्षा को रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, आयोग के वरीय अधिवक्ता ललित किशोर और संजय पांडेय ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने छात्रों को परीक्षा से तीन साल के लिए वंचित किए जाने पर आपत्ति जताई और कहा कि इतनी कठोर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
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